

उद्घाटन के सप्ताहभर बाद ही करीब 90 फीसदी लंबी दीवार भरभराकर गिरी, निर्माण में अनियमितता के आरोप
दैनिक ए एल सी नवभारत उजाला /संवाददाता मोबीन हुसैन
बिलारी। शाहबाद रोड स्थित परशुराम पार्क की नवनिर्मित दीवार उद्घाटन के महज सप्ताहभर बाद ही भरभराकर गिर गई। करीब 38 लाख रुपये की लागत से तैयार कराए गए पार्क की दीवार का लगभग 90 फीसदी हिस्सा गिरने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की जांच कराकर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।जानकारी के अनुसार शाहबाद रोड पर नगर पालिका परिषद बिलारी की करीब 860 गज जमीन तत्कालीन उपजिलाधिकारी द्वारा भगवान परशुराम पार्क के लिए आवंटित की गई थी। आरोप है कि इसमें से करीब 460 गज भूमि को नगर पालिका की देखरेख में भू-माफिया द्वारा बेच दिया गया। मामले को लेकर सभासद आशीष शंकर पांडेय ने मंडलायुक्त मुरादाबाद से शिकायत की थी। जांच के बाद पार्क के लिए उपलब्ध भूमि का क्षेत्रफल करीब 560 गज किए जाने की बात सामने आई।इसके बाद नगर पालिका परिषद बिलारी की ओर से सरकारी धन से करीब 38 लाख रुपये की लागत से परशुराम पार्क का निर्माण कराया गया। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं बरती गईं और करीब 30 लाख रुपये से अधिक की धनराशि के दुरुपयोग की आशंका है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।बताया गया कि पार्क का उद्घाटन खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय द्वारा पिछले सप्ताह ही कराया गया था।उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद पार्क की लंबी दीवार का बड़ा हिस्सा गिरने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप कराया गया होता तो इतनी कम अवधि में दीवार का इस तरह गिरना गंभीर चिंता का विषय नहीं बनता।वहीं उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर राशन डीलरों से पांच-पांच हजार रुपये की कथित वसूली किए जाने की चर्चा भी बिलारी, सहसपुर, थांवला और मिल स्टेशन क्षेत्र में सुनने को मिल रही है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि या दस्तावेज सामने नहीं आया है। पार्क की दीवार गिरने के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, लागत, कार्यदायी संस्था और भुगतान की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी धन से बना निर्माण उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद ढह जाए तो इसकी तकनीकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। मामले में नगर पालिका प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
